|
-
राज्य समन्वय
समिति
नि:शक्त व्यक्ति अधिनियम 1995 की धारा 13 की उपधारा (1 और 2) के
अन्तर्गत एक निकाय का गठन अधिसूचना संख्या-1056/65-1-97-18(1)/96 दिनांक 4
सितम्बर, 1996 के द्वारा किया गया है जिसे राज्य समन्वय समिति के नाम से जाना
जाएगा। इस समिति में कुल 25 सदस्यों को नामित किया गया है जिसे पदेन अध्यक्ष
विभाग के मा० मंत्री जी हैं। इसमें 5 सदस्य विकलांगता से संबंधित स्वैच्छिक
संस्थाओं/संगठनों के प्रतिनिधि हैं तथा विधानमंडल के 3 सदस्यों को भी नामित करने
की व्यवस्था है।
-
राज्य कार्यकारी
समिति
नि:शक्त व्यक्ति अधिनियम 1995 की धारा 19 की उप धारा (1 और 2) के
अन्तर्गत सचिव, विकलांग कल्याण विभाग की अध्यक्षता में राज्य कार्यकारी समिति का
गठन किया गया है। जिसमें कुल 17 सदस्य हैं। समिति में 5 सदस्य स्वैच्छिक
संगठनों/संस्थाओं के प्रतिनिधि हैं जो गैर सरकारी सदस्य हैं। इस समिति की अब तक
कुल 7 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
-
नीति निर्धारण
प्रकोष्ठ
प्रशासन को नयी दिशा देने के लिए उसकी
गुणवत्ता में सुधार लाने एवं शासन के निर्णय को विशेषज्ञ अभिमत पर
आधारित कर उसे जन आकांक्षाओं के अनुरूप पारदर्शी सरल एवं सर्व
स्वीकार बनाने के उद्देश्य से नीति निर्धारण प्रकोष्ठ का गठन किया
गया था। कार्यालय ज्ञाप संख्या-1572/65-1-2001-18-2-96 दिनांक 3
अक्टूबर, 2001 के द्वारा उक्त प्रकोष्ठ को पुर्नगठित किया गया।
वर्तमान में नीति निर्धारण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रमुख सचिव/सचिव,
विकलांग कल्याण विभाग हैं और इस प्रकोष्ठ में कुल 17 सदस्यों को
नामित किया गया है।
-
सलाहकार समिति
आयुक्त विकलांग-जन की अध्यक्षता में गठित है। इसमें विकलांगता के क्षेत्र में
कार्य करने वाले स्वैच्छिक संस्था/संगठनों के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में रखे गये
हैं। इसकी बैठक मासिक आधार पर होनी है।
-
जिला विकलांग
बन्धु का गठन एवं तत्सम्बन्धी कार्यवाही
विकलांगों के आर्थिक उत्थान, पुर्नवासन एवं सेवायोजन सम्बन्धी समस्याओं के निदान
के लिए एकल खिड़की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक जनपद में
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला विकलांग बंधु का गठन कार्यालय ज्ञाप
संख्या-192/65-1-95-18(3)/95 दिनांक 19 दिसम्बर, 1995 के द्वारा किया गया है।
जिला विकलांग बंधु में कुल 14 सदस्यों को रखे जाने की व्यवस्था की गयी है जिसकी
बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार किया जाना अनिवार्य है। समिति में 5 सदस्य
स्वैच्छिक संगठनों/संस्थाओं के प्रतिनिधि हैं जो गैर सरकारी सदस्य हैं।
-
जिला विकलांग बन्धु का गठन
निम्नानुसार किया जायेगा:-
| 1- |
जिलाधिकारी
|
अध्यक्ष |
| 2- |
जिला विकलांग कल्याण अधिकार |
संयोजक/सचिव |
| 3- |
मुख्य विकास अधिकारी |
सदस्य |
| 4- |
सामान्य प्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र |
सदस्य |
| 5- |
सचिव, जिला सैनिक कल्याण परिषद |
सदस्य |
| 6- |
लीड बैंक के अधिकारी |
सदस्य |
| 7- |
क्षेत्रीय प्रबन्धक, उ०प्र० राज्य परिवहन निगम |
सदस्य |
| 8- |
मुख्य चिकित्साधिकारी |
सदस्य |
| 9- |
जिला सेवायोजन अधिकारी |
सदस्य |
विकलांगों के कल्याणार्थ कार्यरत संघों तथा संगठनों के पाँच
प्रतिनिधि सदस्य जिनका मनोनय जिला स्तर पर जिलाधिकारी द्वारा किया
जायेगा।
-
जिला विकलांग बन्धु की बैठक तीन महीने में एक बार की
जायेगी।
-
बैठक की कार्यवाही एक रजिस्टर में पंजीबद्ध की
जायेगी।
-
जिला विकलांग बन्धु द्वारा लिये गये निर्णय सम्बन्धित
विभाग के लिये उसी प्रकार प्रभावी होंगें जिस प्रकार जिला उद्योग
बन्धु के निर्णय प्रभावी होते हैं।
प्रत्येक जनपद में जिला
विकलांग बन्धु का गठन
सुनिश्चित करते हुए इसकी
त्रैमासिक बैठक नियमित रूप से कराये जाने की व्यवस्था है।
उपर्युक्त समितियों की बैठक का कार्यवृत्त
जन सामान्य को उपलब्ध कराया जा सकता है।
|